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बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) कà¥à¤¯à¤¾ है?
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ चिकितà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जिसमें ऊतक का à¤à¤• छोटा सा नमूना लेकर माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से उसकी जांच की जाती है।
ऊतक (टिशà¥à¤¯à¥‚) का नमूना तà¥à¤µà¤šà¤¾, पेट, किडनी, लिवर और फेफड़े के अलावा आपके शरीर में कहीं से à¤à¥€ लिया जा सकता है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ शबà¥à¤¦ का उपयोग आमतौर पर ऊतकों का नमूना लेने के संदरà¥à¤ में किया जाता है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) कब की जाती है?
बायोपà¥à¤¸à¥€ आमतौर पर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में बीमारियों के कारणों का पता लगाने और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के निदान के लिठकी जाती है। इसके अलावा यह असामानà¥à¤¯ कोशिकाओं की पहचान करने और विशेष तरह की बीमारियों का पता लगाने के लिठकिया जाता है।
जहां बीमारी का निदान पहले ही हो जाता है, वहां बायोपà¥à¤¸à¥€ का उपयोग यह मापने के लिठकिया जा सकता है कि यह कितना गंà¤à¥€à¤° है या यह किस सà¥à¤¤à¤° पर पहà¥à¤‚ची है।
उदाहरण के लिठबायोपà¥à¤¸à¥€ के जरिठयह पता लगाया जा सकता है कि लीवर जैसे अंग में कितना गंà¤à¥€à¤° सूजन है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ निमà¥à¤¨ रोगों के निदान के लिठकी जाती है:
कैंसर
पेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• अलà¥à¤¸à¤°
- पाचन तंतà¥à¤° को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाले अलà¥à¤¸à¤°
हेपेटाइटिस
- लिवर में सूजन
किडनी रोग
à¤à¤‚डोमेटà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸
- जहां कोशिकाà¤à¤‚ जो आमतौर पर गरà¥à¤ की परत में होती हैं, वे शरीर में कहीं और पाई जाती हैं।
केवल देखकर या महसूस करके यह बताना असंà¤à¤µ है कि आपकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर या आपके शरीर के अंदर गांठकैंसर के घातक रूप है या नहीं। बायोपà¥à¤¸à¥€ से हमें यह जानने में आसानी होती है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) के पà¥à¤°à¤•ार
बायोपà¥à¤¸à¥€ कई पà¥à¤°à¤•ार की होती है जो आमतौर पर विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का पता लगाने के लिठकी जाती है। बायोपà¥à¤¸à¥€ के उचà¥à¤š पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पà¥à¤°à¤•ार निमà¥à¤¨ हैं :
सà¥à¤•à¥à¤°à¥ˆà¤ªà¤¿à¤‚ग सेल – इसमें सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ
करने के लिठमà¥à¤‚ह के अंदर या सरà¥à¤µà¤¿à¤•à¥à¤¸ (गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾) के ऊतकों के परत से कोशिकाà¤à¤‚ निकाली जाती हैं।
पंच बायोपà¥à¤¸à¥€ - तà¥à¤µà¤šà¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के निदान के लिठतà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤• विशेष उपकरण से à¤à¤• छोटा सा छेद करके तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नमूने लिठजाते हैं।
सà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ - इसमें à¤à¤• विशेष खोखली सà¥à¤ˆ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
की मदद से शरीर के अंग या तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे के ऊतक का नमूना लिया जाता है।
à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपिक बायोपà¥à¤¸à¥€ - इसमें ऊतक निकालने के à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। जैसे कि गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी के दौरान पेट से ऊतक लिया जाता है। (पेट या ऊपरी जठरांतà¥à¤° मारà¥à¤— के निदान की ​​पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾)
à¤à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤œà¤¨à¤² बायोपà¥à¤¸à¥€ - इसमें ऊतक के à¤à¤• बड़े हिसà¥à¤¸à¥‡ को निकालने के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ की जाती है।
पेरिऑपरेटिव बायोपà¥à¤¸à¥€ - मरीज की सहमति
से सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दौरान पेरिऑपरेटिव बायोपà¥à¤¸à¥€ की जाती है। इसमें नमूने की सीधे जांच की जाती है ताकि सरà¥à¤œà¤¨ को निदान दिया जा सके और मरीज को उचित इलाज शà¥à¤°à¥‚ हो सके।
बायोपà¥à¤¸à¥€ कैसे की जाती है यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करेगा कि ऊतक का नमूना कहाठसे लिया जा रहा है। कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार की बायोपà¥à¤¸à¥€ करने के लिठसीटी सà¥à¤•ैनिंग
का उपयोग किया जाता है।
ऊतक के नमूने को निकालने के बाद माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से इसकी असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं की जांच की जाती है। इससे आसानी से समसà¥à¤¯à¤¾ की पहचान हो जाती है। यह अकà¥à¤¸à¤° निदान के लिठकिया जाता है।
ऊतक में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रसायनों का उपयोग करके यह देखा जाता है कि यह कैसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करता है। इस पà¥à¤°à¤•ार की जांच का उपयोग सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के पहचान पर निरà¥à¤à¤° करता है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है, इस बारे में अधिक पढ़ें।
रिकवरी
अधिकांश बायोपà¥à¤¸à¥€ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में केवल लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है और आपको पूरी रात असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रहने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, सरà¥à¤œà¤°à¥€ के लिठजनरल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है, इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आपको रात à¤à¤° असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रहना पड़ सकता है।
अधिकांश तरह की बायोपà¥à¤¸à¥€ में किसी तरह का दरà¥à¤¦ नहीं होता है, हालांकि यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि आपके शरीर में नमूना कहाठसे लिया गया है। आपको हलà¥à¤•ा दरà¥à¤¦ हो सकता है जिसे आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° या सरà¥à¤œà¤¨ की सलाह पर दरà¥à¤¦ निवारक दवाओं से ठीक किया जा सकता है।
वहीं, कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार की बायोपà¥à¤¸à¥€ में कà¥à¤› घंटों के लिठअसà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रहना पड़ सकता है। असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² छोड़ने से पहले आपको टांके या डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ से उबरने के बारे में और पढ़ें।
परिणाम
बायोपà¥à¤¸à¥€ के परिणाम आपको कितनी जलà¥à¤¦à¥€ मिलते हैं यह आपकी समसà¥à¤¯à¤¾ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ और उस असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² पर निरà¥à¤à¤° करेगा जहां आपने यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कराई थी।
किसी गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का संदेह होने पर आपको कà¥à¤› दिनों के à¤à¥€à¤¤à¤° परिणाम उपलबà¥à¤§ हो सकते हैं। हालांकि, यह अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नमूने की पहली जांच के बाद आगे के जांच की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ किसी विशेषजà¥à¤ž की राय लेने के लिठमाइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ à¤à¥€ à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥€ पड़ सकती है। सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल सà¥à¤®à¥€à¤¯à¤° टेसà¥à¤Ÿ का परिणाम आमतौर पर 10-14 दिनों के अंदर आता है।
जब सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दौरान बायोपà¥à¤¸à¥€ की जाती है तो à¤à¤• अलग पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का उपयोग किया जाता है। इसका मतलब है कि परिणाम मिनटों के à¤à¥€à¤¤à¤° उपलबà¥à¤§ हो जाता है, जिससे सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दौरान उचित इलाज करने में मदद मिलती है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤°, असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² सलाहकार या नरà¥à¤¸ आपको रिपोरà¥à¤Ÿ देकर यह समà¤à¤¾à¤à¤‚गे कि उनका कà¥à¤¯à¤¾ मतलब है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ बायोपà¥à¤¸à¥€ का सही परिणाम नहीं मिलता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दोबारा बायोपà¥à¤¸à¥€ करना पड़ सकता है या निदान के लिठदोबारा जांच की जरूरत हो सकती है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) के बाद ठीक होना
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) के बाद ठीक होना
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) आमतौर पर à¤à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जिसमें लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• का उपयोग किया जाता है।
यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤› ही देर में पूरी हो जाती है और आपको रात à¤à¤° असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रहने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होगी।
हालांकि, कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार की बायोपà¥à¤¸à¥€ जैसे कि किसी आंतरिक अंग से ऊतक का नमूना लेने के लिठसामानà¥à¤¯ à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤•
की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ती है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में, आपको रात à¤à¤° असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में रहना पड़ सकता है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ होने के बाद आपको आमतौर पर कोई दरà¥à¤¦ महसूस नहीं होगा। हालांकि यदि मà¥à¤–à¥à¤¯ अंग जैसे लीवर या असà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ से ऊतक का नमूना लिया गया हो तो आपको हलà¥à¤•ा दरà¥à¤¦ महसूस हो सकता है। आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° या सरà¥à¤œà¤¨ आपको दरà¥à¤¦ निवारक दवाà¤à¤‚ लेने की सलाह देंगे।
यदि ऊतक के नमूने को निकालने के लिठचीरा लगाने की जरूरत होती है - जैसे à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपिक बायोपà¥à¤¸à¥€ या à¤à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤œà¤¨à¤² बायोपà¥à¤¸à¥€
के दौरान, तो घाव को बंद करने के लिठटांके लगवाने या डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि आप पूरी तरह आराम कर सकते हैं और असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² के करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¥€ यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ कर सकते हैं कि आपको कोई आंतरिक रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ न हो। बायोपà¥à¤¸à¥€ के बाद आमतौर पर गंà¤à¥€à¤° रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ नहीं होता है। लेकिन अगर à¤à¤¸à¤¾ होता है, तो आपको ऑपरेशन या रकà¥à¤¤ चढ़ाने
की जरूरत पड़ सकती है।
जिन महिलाओं के पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ तंतà¥à¤° जैसे कि गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ से नमूने लिठजाते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ योनि से हलà¥à¤•ा रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ हो सकता है। à¤à¤‚ठन को दूर करने के लिठमरीज को दरà¥à¤¦ निवारक दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं।
जिन पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ (prostate) बायोपà¥à¤¸à¥€ की जाती है उनके पेशाब में खून आ सकता है।
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) कैसे किया जाता है?
बायोपà¥à¤¸à¥€ (Biopsy) कैसे किया जाता है?
ऊतक का नमूना लेने के कई तरीके हैं, यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि ऊतक किस पà¥à¤°à¤•ार लिया जा रहा है और शरीर में यह कहाठसे लिया जा रहा है।
कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार की बायोपà¥à¤¸à¥€ में आमतौर पर सीटी सà¥à¤•ैन
का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
पंच बायोपà¥à¤¸à¥€ (Punch Biopsy)
पंच बायोपà¥à¤¸à¥€ आमतौर पर तà¥à¤µà¤šà¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के जांच के लिठकिया जाता है, जैसे कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर गहरे धबà¥à¤¬à¥‡ और घाव।
पंच बायोपà¥à¤¸à¥€ के दौरान ऊतक की ऊपरी परतों के नमूनों लेने के लिठà¤à¤• विशेष सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल उपकरण से तà¥à¤µà¤šà¤¾ में छोटा छेद किया जाता है। पंच बायोपà¥à¤¸à¥€ करने से पहले मरीज के उस हिसà¥à¤¸à¥‡ को सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने के लिठलोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤•
दिया जाता है।
इसके अलावा तà¥à¤µà¤šà¤¾ की परत का छोटा नमूना लेने के लिठसà¥à¤•ैलà¥à¤ªà¤² यानी à¤à¤• सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल कैंची का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। इसके बाद घाव पर टांके लगा दिठजाते हैं।
सà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ (Needle Biopsy)
फाइन-सà¥à¤ˆ à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ (FNA) बायोपà¥à¤¸à¥€ का उपयोग आमतौर पर अंगों या तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सतह के नीचे की गांठसे ऊतक के नमूने लेने के लिठकिया जाता है। बड़े नमूने की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ने पर कोर सà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ (CNB) का उपयोग किया जाता है।
नमूना लेने के लिठतà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤• विशेष खोखली सà¥à¤ˆ डाली जाती है। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड या à¤à¤•à¥à¤¸-रे का उपयोग सà¥à¤ˆ को सही जगह डालने के लिठकिया जाता है।
जब सà¥à¤ˆ सही जगह पर पहà¥à¤‚च जाती है तो यह ऊतक से नमूने के लिठकà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¤¾ खींच लेती है। सà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ में उस हिसà¥à¤¸à¥‡ को सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने के लिठमरीज को लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जाता है ताकि उसे दरà¥à¤¦ या असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ न हो।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में गांठ(Breast lumps)
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में सà¥à¤¤à¤¨ में गांठका निदान करने के लिठसà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ का उपयोग किया जाता है। सà¥à¤ˆ को गांठमें डाला जाता है और जांच के लिठऊतक का à¤à¤• नमूना लिया जाता है।
कोर सà¥à¤ˆ बायोपà¥à¤¸à¥€ (CNB) का उपयोग आमतौर पर ऊतक के बड़े नमूने लेने के लिठकिया जाता है। कà¥à¤› मामलों में सिसà¥à¤Ÿ को निकालने के लिठफाइन सà¥à¤ˆ à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ (FNA ) बायोपà¥à¤¸à¥€ का उपयोग किया जाता है।
ऑरà¥à¤—ंज़ (Organs)
ऑरà¥à¤—न बायोपà¥à¤¸à¥€ जैसे लीवर या किडनी के बायोपà¥à¤¸à¥€ के लिठà¤à¤• खोखले सà¥à¤ˆ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। पेट में सà¥à¤ˆ डालते समय मरीज को पहले सांस लेने और सांस को रोकने के लिठकहा जाता है।
ऊतक के छोटे नमूने को लेने में कà¥à¤› सेकंड लगते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार की बायोपà¥à¤¸à¥€ से पहले मरीज को लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• दिया जाता है।
असà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ (Bone marrow)
असà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ (बड़ी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के खोखले हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में पाया जाने वाला नरम, जेली जैसा ऊतक) से नमूना लेने के लिठà¤à¤• मोटी सूई का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। बोन मैरो बायोपà¥à¤¸à¥€ आमतौर पर अलग-अलग कारणों से किया जाता है।
ये कारण निमà¥à¤¨ हैं:
लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की कम या अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ (à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾
)
शà¥à¤µà¥‡à¤¤ रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की कम या अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ (लà¥à¤¯à¥‚कोपेनिया)
पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ की कम या अधिक संखà¥à¤¯à¤¾ (रकà¥à¤¤ के थकà¥à¤•े बनाने वाली कोशिकाà¤à¤‚)
इन विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की रकà¥à¤¤ असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के लिठकई अलग-अलग सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारण जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° हो सकते हैं, जैसे कि लà¥à¤¯à¥‚केमिया
(असà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ और शà¥à¤µà¥‡à¤¤ रकà¥à¤¤ कोशिकाओं का कैंसर)।
असà¥à¤¥à¤¿ मजà¥à¤œà¤¾ के नमूने कà¤à¥€-कà¤à¥€ यह जांच करने के लिठलिठजाते हैं कि लà¥à¤¯à¥‚केमिया का इलाज कितना पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ है। साथ ही इससे यह à¤à¥€ पता चलता है कि कैंसर कितना विकसित हà¥à¤† है।
बोन मैरो बायोपà¥à¤¸à¥€ आमतौर पर कमर के ठीक नीचे पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ बोन के उपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ से ली जाती है। इस हिसà¥à¤¸à¥‡ को सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने के लिठआमतौर पर मरीज को लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दी जाती है। इसके अलावा दरà¥à¤¦ या किसी असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ से बचने के लिठसेडेटिव दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं।
à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोपिक बायोपà¥à¤¸à¥€ (Endoscopic Biopsy)
à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप à¤à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ उपकरण है जिसका उपयोग शरीर के अंदर की जांच करने के लिठकिया जाता है। यह à¤à¤• पतली, लचीली टà¥à¤¯à¥‚ब है जिसमें à¤à¤• छोर पर à¤à¤• लाइट और à¤à¤• कैमरा लगा होता है। दूसरे छोर पर छोटे छोटे कटिंग टूल को à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप से जोड़ दिया जाता है, ताकि ऊतकों का नमूना लिया जा सके।
à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप गले या गà¥à¤¦à¤¾ के जरिठशरीर के अंदर डाला जाता है। इसके अलावा सरà¥à¤œà¤¨ à¤à¤• छोटा चीरा लगाकर à¤à¥€ à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप डालते हैं।
मरीज के शरीर के किस हिसà¥à¤¸à¥‡ की जांच करनी है, इसके आधार पर à¤à¤‚डोसà¥à¤•ोप डालने से पहले उसे सामानà¥à¤¯ à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• दिया जाता है।
à¤à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¨à¤² बायोपà¥à¤¸à¥€ (Excisional Biopsy)
à¤à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¨à¤² बायोपà¥à¤¸à¥€ का उपयोग ऊतक के à¤à¤• बड़े हिसà¥à¤¸à¥‡ जैसे गांठको निकालने के लिठकिया जाता है। इस नमूने का काफी करीब से परीकà¥à¤·à¤£ किया जाता है।
शरीर के किस हिसà¥à¤¸à¥‡ में गांठहै, उसके आधार पर मरीज को लोकल या जनरल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• देकर बायोपà¥à¤¸à¥€ की जाती है।
पेरिऑपरेटिव बायोपà¥à¤¸à¥€ (Perioperative Biopsy)
ऑपरेशन के दौरान कà¤à¥€-कà¤à¥€ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ कारणों का पता लगाने के लिठयह बायोपà¥à¤¸à¥€ किया जाता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दौरान ऊतक का नमूना लिया जाता है और तà¥à¤°à¤‚त जांच की जाती है। इससे सरà¥à¤œà¤¨ या डॉकà¥à¤Ÿà¤° को जलà¥à¤¦à¥€ रिजलà¥à¤Ÿ मिलता है और मरीज का इलाज करने में आसानी होती है।
मरीज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पहले से ली गई सहमति के आधार पर सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दौरान गांठमिलने पर इसे पूरी तरह से हटा दिया जाता है।
ऊतक के नमूने की जांच (Testing of Tissue Sample)
ऊतक का नमूना लेने के बाद माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से इसकी जांच के लिठलैब में à¤à¥‡à¤œà¤¾ जाता है। वहां ऊतक की कोशिकाओं का परीकà¥à¤·à¤£ किया जाता है।
ऊतक के नमूने में कोशिकाओं की बारीकी से जांच करके वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• यह निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं कि वे सामानà¥à¤¯ हैं या असामानà¥à¤¯ हैं। उदाहरण के लिà¤, कैंसर कोशिकाà¤à¤‚ सामानà¥à¤¯ कोशिकाओं से अलग दिखती हैं।
ऊतक के नमूने की जांच के साथ ही रासायनिक या आनà¥à¤µà¤‚शिक परीकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ किठजा सकते हैं। उदाहरण के लिà¤, कà¤à¥€-कà¤à¥€ सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• फाइबà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸
(जहां फेफड़े और पाचन तंतà¥à¤° मोटे चिपचिपे मà¥à¤¯à¥‚कस से à¤à¤° जाते हैं) के निदान के लिठरासायनिक परीकà¥à¤·à¤£ किया जाता है। रासायनिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तब होती है जब ऊतक कोशिकाओं में सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• फाइबà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ के लिठजीन मौजूद होते हैं।
सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• फाइबà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ और अनà¥à¤¯ आनà¥à¤µà¤‚शिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का पता लगाने के लिठअजनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ के सेल के नमूने की à¤à¥€ जांच की जा सकती है। यह नमूना पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा (गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²) से लिया जाता है जिसे कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीà¤à¤¸)
कहा जाता है।
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